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Harish Singla

Harish Singla

Harish Singla is a poet not by profession but passion. He defines himself thus:

मुझे खुश रहने की दुआ देने वाले,

हँसी आती है तेरी सादगी पर,

हुजूर काँटा तो काँटा ही रहेगा,

लगा हो गुलाब पर, चाहे झाङी पर